New Bolbam Song 2021 | सुनS राजा पीके गांजा | Khesari Lal Yadav | Suna Raja Pike Ganja

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आ गया Khesari Lal Yadav का काँवर स्पेशल गीत 2021 लामी लामी केश ke baad , Kawar Song - सुनS राजा पीके गांजा. , अगर आप ये Bhojpuri Video को पसंद करते हैं तो Plz हमारे Website link को Share करें. New Bolbam Song 2021 | सुनS राजा पीके गांजा | #Khesari Lal Yadav | Suna Raja Pike Ganja | New Bolbam Song 202

  • ► Album :- Suna Raja Pike Ganja
  • ► Singer :- Khesari Lal Yadav
  • ► Lyrics :- Prakash Pardesi
  • ► Music :- Arya Sarma
  • ► Digital Head :- Sulabh Kumar 
  • ► Label / Company :- Ankita Films
  • ► Parikalpna :- Vivek Singh
  • ► Produced By :- Sulabh Kumar 9102523181
  • ► Video Director :- Aashish Satyarthi 
  • ► Dop:- Santos Navin 
  • ► Coriographer :- Goldi Boby 
  • ► Editar :- Vivek Vfx 
  • ► Digital Partner : - MS Digital 

देवघर के उत्तर में बिहार का भागलपुर जिला, दक्षिणी पूर्व में दुमका, पश्चिम में गिरिडीह है। यह शहर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल है। इस शहर को बाबाधाम नाम से भी जाना जाता है क्योंकि शिव पुराण में देवघर को बारह जोतिर्लिंगों में से एक माना गया है। यहाँ भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है। हर सावन में यहाँ लाखों शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है जो देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों से भी यहाँ आते हैं। इन भक्तों को काँवरिया कहा जाता है। ये शिव भक्त बिहार में सुल्तानगंज से गंगा नदी से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर देवघर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।

देवघर का इतिहास

देवघर का अर्थ है देवों का घर यानि जहाँ देवता निवास करते हैं। देवघर के अन्य नाम है बैद्यानाथ धाम, बाबाधाम आदि। हालाकिं, इतिहास में बाबाधाम के उत्पत्ति का कोई खास उल्लेख नहीं है, लेकिन संस्कृत के कुछ लेखों में इसका उल्लेख हरिताकिवन या केतकीवन के नामों से किया गया है। यह नाम देवघर कुछ सालों पुराना ही प्रतीत होता है, संभवतः इस विशाल मन्दिर के निर्माण के पश्चात। इस मंदिर के निर्माणकर्ता के विषय में अधिक जानकारी तो उपलब्ध नहीं है, पर माना जाता है की पूरण मल, गिद्धौर के महाराज के वंशज ने 1596 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

मुख्य आकर्षण बाबा बैद्यनाथ ऐतिहासिक मंदिर

झारखंड कुछ प्रमुख तीर्थस्थानों का केंद्र है जिनका ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इन्हीं में से एक स्थान है देवघर। यहस्थान संथाल परगना के अंतर्गत आता है। देवघर शांति और भाईचारे का प्रतीक है। यह एक प्रसिद्ध हेल्थ रिजॉर्ट है। लेकिन इसकी पहचान हिंदु तीर्थस्थान के रूप में की जाती है। यहां बाबा बैद्यनाथ का ऐतिहासिक मंदिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। माना जाता है कि भगवान शिव को लंका ले जाने के दौरान उनकी स्थापना यहां हुई थी। प्रतिवर्ष श्रावण मास में श्रद्धालु 100 किमी. लंबी पैदल यात्रा करके सुल्तानगंज से पवित्र जल लाते हैं जिससे बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक किया जाता है। देवघर की यह यात्रा बासुकीनाथ के दर्शन के साथ सम्पन्न होती है।

बैद्यनाथ धाम के अलावा भी यहां कई मंदिर और पर्वत हैं जहां दर्शन कर अपनी इच्छापूर्ति की कामना की जा सकती है। बैद्यनाथ की यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) शुरु होती है। सबसे पहले तीर्थयात्री सुल्तानगढ़ में एकत्र होते हैं जहां वे अपने-अपने पात्रों में पवित्र जल भरते हैं। इसके बाद वे बैद्यनाथ और बासुकीनाथ की ओर बढ़ते हैं। पवित्र जल लेकर जाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह पात्र जिसमें जल है, वह कहीं भी भूमि से न सटे।

बासुकीनाथ मंदिर

बासुकीनाथ अपने शिव मंदिर के लिए जाना जाता है। बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक बासुकीनाथ में दर्शन नहीं किए जाते। यह मंदिर देवघर से 42 किमी. दूर जरमुंडी गांव के पास स्थित है। यहां पर स्थानीय कला के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। इसके इतिहास का संबंध नोनीहाट के घाटवाल से जोड़ा जाता है। बासुकीनाथ मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी हैं।

बैजू मंदिर

बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर के पश्चिम में देवघर के मुख्य बाजार में तीन और मंदिर भी हैं। इन्हें बैजू मंदिर के नाम से जाना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण बाबा बैद्यनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी के वंशजों ने करवाया था। प्रत्येक मंदिर में भगवान शिव का लिंग स्थापित है।

त्रिकुट

देवघर से 16 किमी. दूर दुमका रोड पर एक खूबसूरत पर्वत त्रिकूट स्थित है। इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरनें हैं। बैद्यनाथ से बासुकीनाथ मंदिर की ओर जाने वाले श्रद्धालु मंदिरों से सजे इस पर्वत पर रुकना पसंद करते हैं।

नौलखा मंदिर

देवघर के बाहरी हिस्से में स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प की खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण बालानंद ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था जो शहर से 8 किमी. दूर तपोवन में तपस्या करते थे। तपोवन भी मंदिरों और गुफाओं से सजा एक आकर्षक स्थल है।

नंदन पहाड़

इस पर्वत की महत्ता यहां बने मंदिरों के झुंड के कारण है जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं। पहाड़ की चोटी पर कुंड भी है जहां लोग पिकनिक मनाने आते हैं।

कैसे पहुंचे देवघर?

नजदीकी हवाई अड्डे : राँची, गया, पटना और कोलकाता
सड़क मार्ग द्वारा : कोलकाता से 373 कि.मी., गिरिडीह से 112 कि.मी., पटना से 281 कि.मी.
रेल द्वारा : निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडिह यहाँ से 10 कि॰मी॰ है जो हावड़ा पटना दिल्ली लाइन पर स्थित है। देवघर सड़क मार्ग द्वारा कलकत्ता (373 किमी.), गिरीडीह (112 किमी.), पटना (281 किमी.), दुमका (67 किमी.), मधुपुर (57 किमी.) और शिमुलतला (53 किमी.) से जुड़ा हुआ है।
बस द्वारा भागलपुर, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर और गया से देवघर के लिए सीधी और नियमित बस सेवा उपलब्ध है।

धार्मिक पृष्ठभूमि के अतिरिक्त देवघर की अपनी ऐतिहासिक पहचान भी है। यहां के वैद्यनाथ मंदिर के निर्माण का अपना इतिहास है। यहां अनेक पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर, मूर्तियां, शिलालेख और अन्य प्रतीक विद्यमान हैं। इसके साथ ही अनेक महापुरुष भी समय-समय पर देवघर आकर यहां का महत्व बढ़ाते रहे हैं। इन सबको ऐतिहासिक चित्रों के माध्यम से 'इतिहासघर' में सहेजा गया है।

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